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विस्तृत उत्तर
परम वैराग्य से विमल मुक्ति प्राप्त होती है। पाठ में कहा गया है कि चित्त को विषयभोगों से हटाकर और समस्त विघ्नरूप ब्राह्म ऐश्वर्यों का परित्याग करके महेश्वर प्रसन्न होते हैं। साधक के परम वैराग्य से शिव प्रसन्न होने पर उसे विमल मुक्ति प्राप्त होती है। इसलिए मुक्ति का मार्ग सिद्धियों में आसक्ति नहीं, बल्कि शिव की प्रसन्नता दिलाने वाला वैराग्य है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 56, श्लोक 55-56
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