विस्तृत उत्तर
पार्थिव ऐश्वर्य आठ प्रकार के महान् पार्थिव गुणों से जुड़ा है। इनमें शरीर की स्थूलता, ह्रस्वता, बालकपन, वृद्धता, यौवन, अनेक प्रकार के रूप धारण करना, पार्थिव अंश के बिना शेष चार तत्त्वों से देह धारण करना और नित्य सुगन्धि से युक्त रहना बताया गया है। ये साधक में उत्पन्न होने वाले औपसर्गिक गुण हैं, जिन्हें व्यवहारकाल में सिद्धि कहा जा सकता है, पर समाधि में विघ्न माना गया है।
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