विस्तृत उत्तर
जल संबंधी ऐश्वर्य आप्य गुणों से जुड़ा है। इसमें पृथ्वी की तरह जल में निवास करना, जल से बाहर आने की सामर्थ्य, इच्छा होने पर समुद्र तक पी लेने की शक्ति, जहाँ चाहे वहाँ जल देख लेना, खाए हुए पदार्थ को इच्छा से रसयुक्त बना देना, तेज-वायु-आकाश से देह धारण करना, हाथ से बिना पात्र जलपिण्ड धारण करना और शरीर में व्रण आदि न होना कहा गया है। पार्थिव गुणों सहित इसे सोलह गुणात्मक आप्य ऐश्वर्य कहा गया है।
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