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विस्तृत उत्तर
दर्शना सिद्धि दिव्य रूपों के दर्शन से जुड़ी है। पाठ में कहा गया है कि बिना किसी प्रयत्न के दिव्य रूपों का नेत्रेन्द्रिय से दिखाई पड़ना दर्शनासिद्धि है। यह छह सिद्धियों में चौथी सिद्धि कही गई है। इसमें साधक की दृष्टि सामान्य स्थूल रूपों से आगे दिव्य रूपों को देखने में सक्षम हो जाती है, पर इसे भी योगसाधना में उपसर्गों के प्रसंग में रखा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 53, श्लोक 20
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