विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और सनातन परंपरा में प्रेत को देख सकने की क्षमता के विषय में वर्णन मिलता है।
साधारण मनुष्य नहीं देख सकते — प्रेत सूक्ष्म शरीर में होते हैं जो साधारण मानवीय इंद्रियों से दिखाई नहीं देते। 'ये दिखाई नहीं देती लेकिन बलवान भी नहीं होती।'
साधक और योगी — जिन्होंने ध्यान और साधना से अपनी इंद्रियों को सूक्ष्म बना लिया हो, वे प्रेत-अस्तित्व को अनुभव कर सकते हैं।
मरणासन्न व्यक्ति — गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के निकट आने पर जीव को दिव्य दृष्टि मिलती है जिससे वह अपने पूर्वजों और पितरों को देख सकता है।
सद्गुरु और तांत्रिक — परंपरागत मान्यता के अनुसार कुछ विशेष साधनाओं से प्रेत-आत्माओं का दर्शन और संवाद संभव है।
परिजन अनुभव कर सकते हैं — प्रेत-आत्मा का प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होता परंतु उसकी उपस्थिति अनुभव हो सकती है — स्वप्न में दर्शन, घर में असामान्य घटनाएँ, मन में अचानक स्मृति आना।





