महाभारतसंजय को दिव्य दृष्टि किसने दी?संजय को दिव्य दृष्टि महर्षि वेदव्यास ने दी थी ताकि वे कुरुक्षेत्र का युद्ध हस्तिनापुर में बैठे धृतराष्ट्र को सुना सकें। धृतराष्ट्र ने स्वयं दिव्य दृष्टि लेने से यह कहकर मना किया था कि वे अपने स्वजनों को लड़ते नहीं देख सकते।#संजय#दिव्य दृष्टि#वेदव्यास
दिव्यास्त्र'सुदर्शन' शब्द का क्या अर्थ है?'सुदर्शन' का अर्थ है 'शुभ दृष्टि' या 'दिव्य दृष्टि'। 'सु' यानी शुभ और 'दर्शन' यानी दृष्टि। यह ज्ञान और विवेक का प्रतीक है।#सुदर्शन#शब्द अर्थ
मंत्र विधिमंत्र जप से दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है क्या?अज्ञा चक्र सक्रियता = 'दिव्य दृष्टि' (अंतर्ज्ञान, सूक्ष्म बोध)। पतंजलि: 'मूर्ध्ज्योतिषि सिद्धदर्शनम्'। ॐ = अज्ञा प्रभावित। वर्षों की साधना — रातोंरात नहीं। प्रतीकात्मक, भौतिक नहीं। भ्रामक दावों से बचें। गुरु अनिवार्य।#दिव्य दृष्टि#अज्ञा चक्र#ध्यान
लोकब्रह्मा ने कारणोदक सागर कैसे देखा?उन्होंने ध्यान की सूक्ष्म दृष्टि से कारणोदक सागर देखा।#ब्रह्मा#कारणोदक सागर#दिव्य दृष्टि
मंत्र दीक्षा'दीक्षा' शब्द का क्या अर्थ है?'दीक्षा' = 'दा' (देना) + 'क्षि' (क्षय करना) — गुरु शिष्य को दिव्य दृष्टि और ज्ञान देते हैं और संचित कर्मों, पापों और अज्ञान का क्षय करते हैं। यह शब्द-कथन नहीं, चेतन ऊर्जा का हस्तांतरण (शक्तिपात) है।#दीक्षा शब्द अर्थ#दा क्षि#दिव्य दृष्टि
शव साधना की विधिशव साधना में शव को किसका स्वरूप मानते हैं?शव साधना में शव को भैरव का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है — यह अद्वैत-दर्शन की परीक्षा है जिसमें साधक को मृत्यु के प्रतीक शव में भी शिव का दर्शन करना होता है।#भैरव स्वरूप#शव पूजा#दिव्य दृष्टि
रामचरितमानस — बालकाण्ड'श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिव्य दृष्टि हियँ होती' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — श्रीगुरु के चरण-नखों की ज्योति मणियों के प्रकाश समान है, जिसके स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। यह प्रकाश अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करता है और जिसके हृदय में आ जाये उसके बड़े भाग्य हैं।#बालकाण्ड#गुरु वन्दना#चौपाई
जीवन एवं मृत्युप्रेत को कौन देख सकता है?साधारण मनुष्य प्रेत को नहीं देख सकते — यह सूक्ष्म शरीर में होता है। साधक, योगी और उच्च कोटि के तांत्रिक देख सकते हैं। परिजन स्वप्न में अनुभव कर सकते हैं। मरणासन्न व्यक्ति को दिव्य दृष्टि से दर्शन होता है।#प्रेत#दर्शन#दिव्य दृष्टि
जीवन एवं मृत्युदिव्य दृष्टि मिलने पर व्यक्ति क्या देखता है?दिव्य दृष्टि में व्यक्ति अपना पूरा जीवन एक क्षण में देखता है। पुण्यात्मा को दिव्य प्रकाश और पूर्वज दिखते हैं, पापी को यमदूत और भयावह दृश्य। आत्मा अपने शरीर को बाहर से भी देख सकती है।#दिव्य दृष्टि#मृत्यु#जीवन समीक्षा
जीवन एवं मृत्युदिव्य दृष्टि क्या होती है?दिव्य दृष्टि वह आत्मिक शक्ति है जिससे सूक्ष्म और दैवीय सत्य देखा जाता है। मृत्यु के समय इंद्रियाँ शिथिल होने पर यह स्वतः मिलती है। इसमें व्यक्ति अपना जीवन और आत्मा का वास्तविक स्वरूप देख सकता है।#दिव्य दृष्टि#आत्मज्ञान#मृत्यु
जीवन एवं मृत्युक्या मृत्यु के समय व्यक्ति दिव्य दृष्टि प्राप्त करता है?हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के अंतिम क्षणों में दिव्य दृष्टि मिलती है। इसमें व्यक्ति अपना पूरा जीवन एक क्षण में देखता है। पुण्यात्मा को दिव्य प्रकाश दिखता है, पापी को यमदूत और नरक।#दिव्य दृष्टि#मृत्यु#गरुड़ पुराण
जीवन एवं मृत्युक्या मृत्यु के समय व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होता है?गरुड़ पुराण और कठोपनिषद के अनुसार मृत्यु के समय दिव्य दृष्टि के रूप में एक अनायास बोध होता है। यह पूर्ण ज्ञान नहीं, परंतु जीवन के सत्य का प्रकाश है। जिसने जीवन में साधना की हो, उसके लिए यह मोक्ष का अवसर बनता है।#मृत्यु#ज्ञान#दिव्य दृष्टि
जीवन एवं मृत्युमृत्यु के समय व्यक्ति की चेतना कैसी होती है?मृत्यु के समय व्यक्ति को दिव्य दृष्टि मिलती है और वह अपना पूरा जीवन देख सकता है। चेतना की अवस्था कर्मों पर निर्भर करती है — पुण्यात्मा को शांति, पापी को भय। अंतिम विचार अगला जन्म तय करता है।#चेतना#मृत्यु#दिव्य दृष्टि
कुंडलिनी योगआज्ञा चक्र खुलने पर क्या दिव्य दृष्टि मिलती है?आज्ञा चक्र: (1) अंतर्ज्ञान (2) ॐकार नाद (3) श्वेत/नीला/बैंगनी प्रकाश (4) दूरदर्शन/पूर्वाभास (सीमित) (5) त्रिकालज्ञान (आंशिक) (6) एकाग्रता+साक्षी भाव (7) भौंहों दबाव (8) दिव्य स्वप्न। सिद्धि≠लक्ष्य। भ्रम vs दिव्य=गुरु।#आज्ञा चक्र#तीसरा नेत्र#दिव्य दृष्टि