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मंत्र विधि📜 पतंजलि योग सूत्र, तंत्र शास्त्र, कुण्डलिनी योग1 मिनट पठन

मंत्र जप से दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है क्या?

संक्षिप्त उत्तर

अज्ञा चक्र सक्रियता = 'दिव्य दृष्टि' (अंतर्ज्ञान, सूक्ष्म बोध)। पतंजलि: 'मूर्ध्ज्योतिषि सिद्धदर्शनम्'। ॐ = अज्ञा प्रभावित। वर्षों की साधना — रातोंरात नहीं। प्रतीकात्मक, भौतिक नहीं। भ्रामक दावों से बचें। गुरु अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

दिव्य दृष्टि' = अज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र) की सक्रियता — सामान्य दृष्टि से परे 'देखने' की क्षमता।

शास्त्रीय

  • पतंजलि (3.32): 'मूर्ध्ज्योतिषि सिद्धदर्शनम्' — मस्तक के ज्योतिष्मान प्रकाश में सिद्ध पुरुषों का दर्शन।
  • कुण्डलिनी योग: अज्ञा चक्र सक्रिय = अंतर्ज्ञान, भविष्य बोध, सूक्ष्म जगत दर्शन।
  • ॐ जप = अज्ञा चक्र सीधे प्रभावित।

परंतु

  • 'दिव्य दृष्टि' = वर्षों/दशकों की गहन साधना — रातोंरात नहीं।
  • भौतिक 'तीसरी आँख' नहीं खुलती — प्रतीकात्मक।
  • अंतर्ज्ञान (intuition) बढ़ना = प्रारंभिक 'दिव्य दृष्टि'।
  • अतिशयोक्ति और भ्रामक दावों से बचें।
  • गुरु मार्गदर्शन अनिवार्य।
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शास्त्रीय स्रोत
पतंजलि योग सूत्र, तंत्र शास्त्र, कुण्डलिनी योग
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