विस्तृत उत्तर
विधि में शव को भैरव का स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है।
यह साधना उस साधक के अद्वैत-दर्शन की अंतिम और सबसे कठिन परीक्षा है, जहाँ उसे मृत्यु के साक्षात प्रतीक, शव में भी अपने आराध्य शिव का ही दर्शन करना होता है।
शव साधना में शव को भैरव का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है — यह अद्वैत-दर्शन की परीक्षा है जिसमें साधक को मृत्यु के प्रतीक शव में भी शिव का दर्शन करना होता है।
विधि में शव को भैरव का स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है।
यह साधना उस साधक के अद्वैत-दर्शन की अंतिम और सबसे कठिन परीक्षा है, जहाँ उसे मृत्यु के साक्षात प्रतीक, शव में भी अपने आराध्य शिव का ही दर्शन करना होता है।
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको शव साधना की विधि से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।