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जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

दिव्य दृष्टि मिलने पर व्यक्ति क्या देखता है?

दिव्य दृष्टि में व्यक्ति अपना पूरा जीवन एक क्षण में देखता है।

संक्षिप्त उत्तर

दिव्य दृष्टि में व्यक्ति अपना पूरा जीवन एक क्षण में देखता है। पुण्यात्मा को दिव्य प्रकाश और पूर्वज दिखते हैं, पापी को यमदूत और भयावह दृश्य। आत्मा अपने शरीर को बाहर से भी देख सकती है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में इस विषय का विस्तृत वर्णन मिलता है। जब मृत्यु के अंतिम क्षणों में दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है, तो व्यक्ति अनेक अनुभव एक साथ करता है।

व्यक्ति अपने पूरे जीवन की घटनाओं को एक क्षण में देख सकता है — जन्म से लेकर मृत्यु तक का समस्त वृत्तांत। उसके अच्छे और बुरे कर्म उसके सामने स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं। पुण्यकर्म सुकून और संतोष का अनुभव कराते हैं, पापकर्म पछतावे और भय का।

गरुड़ पुराण के अनुसार, यह दिव्य दृष्टि व्यक्ति के कर्मों के अनुसार भिन्न होती है। जो पुण्यात्मा है, उसे दिव्य प्रकाश, देवदूत और स्वर्गीय दृश्य दिखते हैं। जो पापी है, उसे यमदूत, नरक के भयावह दृश्य और यातना की आभास होती है। कुछ को अपने प्रिय पूर्वज दिखाई देते हैं जो उन्हें आगे की यात्रा के लिए बुलाते हैं।

इसके साथ ही आत्मा अपने स्थूल शरीर को बाहर से देखने में समर्थ होती है। यह एक ऐसा अनुभव है जिसे आधुनिक विज्ञान में 'Near Death Experience' (मृत्यु-निकट अनुभव) के नाम से जाना जाता है और जो विश्व भर में लाखों लोगों ने अनुभव किया है।

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