विस्तृत उत्तर
विधि में शव का शास्त्रोक्त चयन, स्थान का शुद्धिकरण, मंत्रों द्वारा रक्षा-चक्र का निर्माण, और फिर शव को भैरव का स्वरूप मानकर उसकी पूजा सम्मिलित है।
इसके पश्चात साधक शव पर बैठकर या उसके समीप बैठकर अपने गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र का जाप और गहन ध्यान करता है।





