विस्तृत उत्तर
जनलोक के निवासियों को कई प्रमुख ईश्वरीय सिद्धियाँ स्वभावतः प्राप्त होती हैं। प्रभाव के रूप में उनका तेज और आभा असीमित होती है और पूरे लोक को प्रकाशित करती है। विजय के रूप में वे प्रकृति के तीनों गुणों, सत्त्व, रज और तम, पर विजय प्राप्त कर चुके होते हैं। ऐश्वर्य के रूप में वे अष्ट सिद्धियों से युक्त होते हैं और मन की गति से ब्रह्मांड में विचरण कर सकते हैं। स्थिति के रूप में उनके शरीर का क्षय नहीं होता और वे कल्पों तक एक अवस्था में स्थिर रहते हैं। वैराग्य के रूप में उन्हें किसी भी लोक के भोग में आसक्ति नहीं होती। दर्शन के रूप में उन्हें परब्रह्म और सृष्टि के गूढ़ रहस्यों का प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त होता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





