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वेद एवं उपनिषद⏱ 2 मिनट पठन

ब्रह्म सूत्र क्या है?

ब्रह्मसूत्र महर्षि बादरायण (वेदव्यास) द्वारा रचित वेदांत दर्शन का मूलग्रंथ है जिसमें 555 सूत्रों में उपनिषदों का दार्शनिक सार प्रस्तुत किया गया है।

संक्षिप्त उत्तर

ब्रह्मसूत्र महर्षि बादरायण (वेदव्यास) द्वारा रचित वेदांत दर्शन का मूलग्रंथ है जिसमें 555 सूत्रों में उपनिषदों का दार्शनिक सार प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्थानत्रयी का तीसरा ग्रंथ है और इस पर शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य ने महत्वपूर्ण भाष्य लिखे।

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विस्तृत उत्तर

ब्रह्मसूत्र वेदांत दर्शन का आधारभूत ग्रंथ है। इसे वेदान्त सूत्र, उत्तर-मीमांसा सूत्र, शारीरक सूत्र आदि नामों से भी जाना जाता है। इसके रचयिता महर्षि बादरायण हैं जिन्हें वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है।

सनातन धर्म में किसी भी वेदांतिक सिद्धांत को स्थापित करने के लिए तीन ग्रंथों का प्रमाण आवश्यक है — उपनिषद (श्रुति प्रस्थान), श्रीमद्भगवद्गीता (स्मृति प्रस्थान) और ब्रह्मसूत्र (न्याय प्रस्थान)। इन तीनों को 'प्रस्थानत्रयी' कहते हैं।

ब्रह्मसूत्र का प्रयोजन यह है कि उपनिषदों में अनेक स्थानों पर परस्पर विरोधी प्रतीत होने वाले विचारों को एकसूत्र में पिरोया जाए। इसमें 4 अध्याय और 555 सूत्र हैं। चार अध्याय हैं — समन्वय (उपनिषदों में समन्वय), अविरोध (अन्य दर्शनों से विरोध का निराकरण), साधन (ब्रह्मप्राप्ति के उपाय) और फल (मोक्ष का स्वरूप)।

इसका पहला सूत्र है — 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा' — अब इसलिए ब्रह्म को जानने की जिज्ञासा करो।

इस एक ग्रंथ पर अनेक भाष्य लिखे गए जो परस्पर भिन्न दार्शनिक सम्प्रदायों के आधार बने — शंकराचार्य का अद्वैत भाष्य, रामानुजाचार्य का विशिष्टाद्वैत श्रीभाष्य और मध्वाचार्य का द्वैत अनुव्याख्यान।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

ब्रह्म सूत्र क्या है को संदर्भ सहित समझें

ब्रह्म सूत्र क्या है का सबसे सीधा सार यह है: ब्रह्मसूत्र महर्षि बादरायण (वेदव्यास) द्वारा रचित वेदांत दर्शन का मूलग्रंथ है जिसमें 555 सूत्रों में उपनिषदों का दार्शनिक सार प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्थानत्रयी का तीसरा ग्रंथ...

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