विस्तृत उत्तर
सत्यलोक को पुराणों और उपनिषदों में 'ब्रह्मपुर' भी कहा गया है। ब्रह्मपुर का अर्थ है ब्रह्मा की नगरी या ब्रह्म का पुर (नगर)। छांदोग्य उपनिषद (८.१) के आधार पर वैदिक दर्शन स्पष्ट करता है कि ब्रह्मपुर के ठीक केन्द्र में एक महान और भव्य राजमहल है जहाँ स्वयं भगवान ब्रह्मा अपनी अर्धांगिनी माता सरस्वती के साथ निवास करते हैं। इस ब्रह्मपुर के भीतर एक सूक्ष्म आकाश (अन्तराकाश) वाला कमल पुष्प है जिसे परम सत्य की खोज करने वालों का अन्तिम खगोलीय और आध्यात्मिक गंतव्य बताया गया है। कौषीतकि ब्राह्मण उपनिषद के प्रथम अध्याय में इस ब्रह्मपुर नगरी की वास्तुकला, परिदृश्य और वहाँ पहुँचने वाले जीव के स्वागत का अत्यन्त सूक्ष्म और रहस्यमयी विवरण मिलता है।
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