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विस्तृत उत्तर
बिल्वाष्टकम् के सातवें श्लोक के अनुसार: 'दर्शनं बिल्ववृक्षस्य, स्पर्शनं पापनाशनम्। अघोरपापसंहारं, एकबिल्वं शिवार्पणम्॥' अर्थात, बिल्व वृक्ष का दर्शन मात्र और उसका स्पर्श करना ही समस्त पापों का नाशक है, यहाँ तक कि यह भयंकर अघोर पापों का भी संहार कर देता है।
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