विस्तृत उत्तर
बिल्वाष्टकम् के चौथे और पांचवें श्लोक के अनुसार, एक बिल्वपत्र अर्पण करने का पुण्य करोड़ों हाथी दान करने (दन्तिकोटि सहस्राणि), सैकड़ों वाजपेय यज्ञ करने, करोड़ों कन्याओं का महादान करने, शालिग्राम शिला दान करने और सोमयज्ञ करने के महान पुण्य के बराबर है।





