विस्तृत उत्तर
भगवद्गीता के आठवें अध्याय के सोलहवें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं — आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन। अर्थात भौतिक ब्रह्माण्ड के सर्वोच्च लोक (ब्रह्मलोक या सत्यलोक) तक पहुँचने वाले सभी लोक अंततः प्रलय के अधीन हैं। जो सकाम कर्मों के आधार पर वहाँ जाते हैं वे पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी में लौट आते हैं। किन्तु जो विशुद्ध भक्त या निष्काम योगी क्रम-मुक्ति के अधिकारी होकर वहाँ जाते हैं वे वापस नहीं लौटते बल्कि महाप्रलय की प्रतीक्षा करते हैं और अंततः मोक्ष प्राप्त करते हैं। रामानुजाचार्य ने भी यह सिद्ध किया कि सत्यलोक के निवासी वास्तव में पुनर्जन्म नहीं लेते।
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