विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में साधु दर्शन का लाभ भक्ति के वचनों से बताया गया है। जब नारदजी यमुना तट पर उस दुखी युवती के पास जाते हैं, तब वह उनसे कहती है कि वे क्षणभर ठहरकर उसकी चिंता दूर करें, क्योंकि साधु का दर्शन संसार के पापों को नष्ट करने वाला है। वह यह भी कहती है कि नारदजी के वचन से उसके दुख की शांति होगी और बड़े भाग्य से ही ऐसे दर्शन होते हैं। बाद में वह नारदजी से कहती है कि आपका समागम मेरा सौभाग्य है और संसार में साधुओं का दर्शन सभी सिद्धियों का परम कारण है। उसी प्रसंग में वह प्रह्लाद और ध्रुव के उदाहरण देती है: प्रह्लाद ने नारदजी के उपदेश से माया पर विजय पाई और ध्रुव ने उनकी कृपा से ध्रुवपद पाया। इसलिए साधु दर्शन को पाप-नाशक, दुख-शांत करने वाला, सौभाग्यदायक और आध्यात्मिक उन्नति का कारण बताया गया है।
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