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विस्तृत उत्तर
बिल्वाष्टकम् के तीसरे श्लोक के अनुसार: 'अखण्ड बिल्वपत्रेण, पूजिते नन्दिकेश्वरे। शुध्यन्ति सर्वपापेभ्यो, एकबिल्वं शिवार्पणम्॥' अर्थात, एक भी अखंडित (बिना कटा-फटा और छिद्र रहित) बिल्वपत्र से नंदीश्वर भगवान का पूजन करने पर, मनुष्य समस्त पापों से पूर्णतः शुद्ध हो जाता है।
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