विस्तृत उत्तर
गरीबी (दारिद्र्य) और भारी कर्ज (ऋण) से मुक्ति के लिए प्रदोष स्तोत्रम् का यह विशेष श्लोक पढ़ना चाहिए: 'महादारिद्र्यमग्नस्य महापापहतस्य च... महाशोकनिविष्टस्य महा ऋणभारपरीतस्य... प्रसीद मम शङ्कर ॥'। इसका अर्थ है कि हे शंकर! मैं महा-दारिद्र्य और कर्ज के भारी बोझ से दबा हुआ हूँ, मुझ पर आप प्रसन्न हों।





