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विस्तृत उत्तर
- 1भौम प्रदोष (मंगल वार): मंगल शक्ति और ऋण का कारक है। इसे 'ऋण मोचन प्रदोष' कहते हैं। कर्ज से मुक्ति, रक्त विकार और शत्रुओं के भय से बचने के लिए शिव पूजा के साथ 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करने से शीघ्र लाभ होता है।
- 2सौम्यवारा प्रदोष (बुध वार): बुध बुद्धि और व्यापार का कारक है। यह व्रत ज्ञान, शिक्षा और बुद्धि के विकास के लिए है। विद्यार्थियों, लेखकों और व्यापारियों के लिए यह अत्यंत फलदायी है।
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