विस्तृत उत्तर
- 1गुरु प्रदोष (बृहस्पति वार): बृहस्पति धर्म और अध्यात्म का ग्रह है। स्कंद पुराण के अनुसार यह व्रत पितरों के आशीर्वाद, गुप्त शत्रुओं के दमन और घर में मांगलिक कार्य संपन्न कराने के लिए है। यह आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी श्रेष्ठ है।
- 2भृगुवारा प्रदोष (शुक्र वार): शुक्र सौंदर्य और ऐश्वर्य का कारक है। इसे 'शुक्र प्रदोष' कहते हैं। यह दांपत्य सुख, सौभाग्य, भौतिक सुख-सुविधाओं (Wealth) और पति-पत्नी के बीच कलह दूर करने के लिए रामबाण है।





