विस्तृत उत्तर
मंगलसूत्र बांधना हिन्दू विवाह का अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग है, विशेषकर दक्षिण भारतीय परम्परा में। यह सुहाग का प्रतीक माना जाता है।
विधान
1दक्षिण भारत (ताली/मंगलसूत्र बांधना — प्रमुख अनुष्ठान)
- ▸दक्षिण भारतीय विवाह (तमिल, तेलुगु, कन्नड, मलयालम) में 'ताली' या 'मंगलसूत्र' बांधना विवाह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण है।
- ▸वर, वधू के गले में मंगलसूत्र बांधता है — तीन गाँठें लगाता है।
- ▸तीन गाँठों का अर्थ: प्रथम = वर द्वारा, द्वितीय और तृतीय = वर की बहन या परिवार की स्त्री द्वारा (कुछ परम्पराओं में तीनों वर द्वारा)। तीन गाँठें ब्रह्मा-विष्णु-शिव, या मन-वचन-कर्म की एकता का प्रतीक।
- ▸मुहूर्त के ठीक समय पर, मंगल वाद्य (नाद स्वरम) और वैदिक मंत्रों के साथ।
2उत्तर भारत
- ▸उत्तर भारतीय विवाह में मंगलसूत्र बांधना सामान्यतः अलग से एक अनुष्ठान के रूप में नहीं होता, किन्तु कई परम्पराओं में वर, वधू को मंगलसूत्र पहनाता है।
- ▸उत्तर भारत में विवाह के प्रमुख कर्म: कन्यादान, पाणिग्रहण, सप्तपदी, सिन्दूरदान — ये अधिक केन्द्रीय हैं।
- ▸मंगलसूत्र प्रायः विवाह के बाद पहनाया जाता है।
3महाराष्ट्र
- ▸मराठी विवाह में मंगलसूत्र बांधना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। वर, वधू के गले में काले मोतियों वाला मंगलसूत्र बांधता है।
मंगलसूत्र का प्रतीकात्मक अर्थ
- ▸सौभाग्य और सुहाग का चिह्न।
- ▸पति-पत्नी के अटूट बन्धन का प्रतीक।
- ▸काले मोती (कुछ परम्पराओं में) बुरी दृष्टि से रक्षा।
- ▸सोने का पेण्डण्ट सम्पन्नता और मंगल का प्रतीक।
ध्यान दें: मंगलसूत्र बांधने का विधान मूलतः एक परम्परागत प्रथा है। प्राचीन वैदिक विवाह पद्धति (गृह्यसूत्र) में सप्तपदी, पाणिग्रहण, लाजाहोम आदि प्रमुख कर्म हैं — मंगलसूत्र का स्पष्ट उल्लेख वैदिक ग्रंथों में नहीं मिलता। यह कालान्तर में विकसित हुई एक महत्वपूर्ण लोकपरम्परा है।





