ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
षोडश संस्कार⏱ 2 मिनट पठन

गर्भाधान संस्कार कब और कैसे करें?

गर्भाधान = प्रथम संस्कार (16 में से)। कब: विवाह उपरान्त ऋतुकाल में, शुभ मुहूर्त।

संक्षिप्त उत्तर

गर्भाधान = प्रथम संस्कार (16 में से)। कब: विवाह उपरान्त ऋतुकाल में, शुभ मुहूर्त। विधि: स्नान → गणपति पूजन → हवन → विष्णु/प्रजापति आह्वान → 'विष्णुर्योनिं कल्पयतु...' मंत्र। श्रेष्ठ सन्तान प्राप्ति हेतु ईश्वर से प्रार्थना। गृह्यसूत्र, मनुस्मृति में विधान।

📖

विस्तृत उत्तर

गर्भाधान संस्कार षोडश (16) संस्कारों में प्रथम है। यह विवाह के पश्चात् सन्तान प्राप्ति हेतु किया जाने वाला अनुष्ठान है।

कब करें

  • ▸विवाह के बाद ऋतुकाल (स्त्री के मासिक चक्र के उपरान्त) में।
  • ▸गृह्यसूत्रों में चतुर्थ रात्रि से सोलहवीं रात्रि तक का काल उपयुक्त बताया गया है।
  • ▸सम रात्रियाँ (6ठी, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 14वीं, 16वीं) पुत्र प्राप्ति हेतु और विषम रात्रियाँ कन्या प्राप्ति हेतु शुभ मानी गई हैं (यह परम्परागत मान्यता है, वैज्ञानिक आधार नहीं है)।
  • ▸शुभ नक्षत्र और मुहूर्त देखकर करें।

कैसे करें (सरल विधि)

  1. 1पति-पत्नी स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।
  2. 2गणेश पूजन और कलश स्थापना।
  3. 3हवन (अग्निहोत्र) — विशिष्ट मंत्रों से आहुतियाँ।
  4. 4पत्नी के गर्भ में श्रेष्ठ सन्तान की स्थापना हेतु प्रार्थना।
  5. 5विष्णु, प्रजापति, सिनीवाली, सरस्वती आदि देवताओं का आह्वान।
  6. 6पत्नी का स्पर्श करते हुए विशिष्ट मंत्र पाठ।

प्रमुख मंत्र (ऋग्वेद/गृह्यसूत्र से)

विष्णुर्योनिं कल्पयतु, त्वष्टा रूपाणि पिंशतु।

आसिञ्चतु प्रजापतिर्धाता गर्भं दधातु ते॥'

आधुनिक सन्दर्भ

आज यह संस्कार प्रायः सरल पूजा-हवन के रूप में किया जाता है। कई परिवारों में यह विवाह रात्रि में ही सम्पन्न माना जाता है। मूल भावना है — ईश्वर से श्रेष्ठ, स्वस्थ और सदाचारी सन्तान की प्रार्थना।

लोग यह भी पूछते हैं

कब करें

- विवाह के बाद ऋतुकाल (स्त्री के मासिक चक्र के उपरान्त) में। - गृह्यसूत्रों में चतुर्थ रात्रि से सोलहवीं रात्रि तक का काल उपयुक्त बताया गया है। - सम रात्रियाँ (6ठी, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 14वीं, 16वीं) पुत्र प्राप्ति हेतु और विषम रात्रियाँ कन्या प्राप्ति हेतु शुभ मानी गई हैं (यह परम्परागत मान्यता है, वैज्ञानिक आधार नहीं है)।

कैसे करें (सरल विधि)

1. पति-पत्नी स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें। 2. गणेश पूजन और कलश स्थापना। 3. हवन (अग्निहोत्र) — विशिष्ट मंत्रों से आहुतियाँ। 4. पत्नी के गर्भ में श्रेष्ठ सन्तान की स्थापना हेतु प्रार्थना। 5. विष्णु, प्रजापति, सिनीवाली, सरस्वती आदि देवताओं का आह्वान। 6. पत्नी का स्पर्श करते हुए विशिष्ट मंत्र पाठ।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

गर्भाधानसंस्कारगृहस्थसन्तान
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

गर्भाधान संस्कार कब और कैसे करें — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको षोडश संस्कार से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#गर्भाधान#संस्कार#गृहस्थ#सन्तान