विस्तृत उत्तर
सीमंतोन्नयन षोडश संस्कारों में तृतीय है। यह गर्भवती स्त्री के मंगल और गर्भस्थ शिशु की रक्षा के लिए किया जाता है। आधुनिक भाषा में इसे 'गोद भराई' (Baby Shower) की वैदिक विधि कह सकते हैं।
'सीमन्तोन्नयन' का अर्थ
सीमन्त' = सिर की माँग (बालों का विभाजन), 'उन्नयन' = ऊपर उठाना। अर्थात् गर्भवती के बालों की माँग ऊपर की ओर सँवारना — यह मंगल और सौभाग्य का प्रतीक है।
कब करें
- ▸गर्भ के छठवें या आठवें मास में (सामान्यतः 6-8 मास)।
- ▸कुछ गृह्यसूत्रों में चौथे मास से आठवें मास तक का विधान।
- ▸शुभ नक्षत्र और तिथि में।
विधि
- 1तैयारी: गर्भवती स्नान करके श्रृंगार करे, नए वस्त्र पहने। शुभ स्थान पर आसन।
- 2हवन: अग्नि प्रज्वलन, गणपति पूजन, विशिष्ट मंत्रों से आहुतियाँ।
- 3सीमन्तोन्नयन (माँग भरना): पति, गर्भवती की माँग में सिन्दूर/कुमकुम लगाए और सेही (साही/Porcupine) के काँटे या दातून से (प्रतीकात्मक रूप में) माँग ऊपर की ओर सँवारे। मंत्र: 'भद्रं ते गर्भं...' आदि।
- 4वीणा वादन: कुछ गृह्यसूत्रों में गर्भवती के कान में वीणा या मधुर संगीत सुनाने का विधान — गर्भस्थ शिशु पर सकारात्मक प्रभाव।
- 5ब्राह्मण भोजन और दान।
- 6सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद।
- 7गर्भवती को फल, मिठाई, वस्त्र, आभूषण भेंट।
उद्देश्य
- ▸गर्भवती का मनोबल बढ़ाना।
- ▸गर्भस्थ शिशु की रक्षा।
- ▸बुरी दृष्टि/नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा।
- ▸परिवार में उत्सव का वातावरण।





