ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
षोडश संस्कार⏱ 2 मिनट पठन

कर्णवेध संस्कार का क्या महत्व है?

कर्णवेध = कान छेदन संस्कार। कब: 3-5 वर्ष (या 6-7 मास), शुभ मुहूर्त। महत्व: (1) वैदिक संस्कार — रक्षात्मक।

संक्षिप्त उत्तर

कर्णवेध = कान छेदन संस्कार। कब: 3-5 वर्ष (या 6-7 मास), शुभ मुहूर्त। महत्व: (1) वैदिक संस्कार — रक्षात्मक। (2) सुश्रुत संहिता: हर्निया/अंडकोष वृद्धि से रक्षा, मस्तिष्क विकास बिन्दु। विधि: गणपति पूजन → हवन → प्रातःकाल सूर्य रोशनी में → स्वर्ण/चाँदी तार से। स्वच्छता अनिवार्य।

📖

विस्तृत उत्तर

कर्णवेध (कान छेदना) षोडश संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इसमें बालक/बालिका के कान छेदे जाते हैं।

कब करें

  • ▸सामान्यतः जन्म के तीसरे या पाँचवें वर्ष में।
  • ▸कुछ परम्पराओं में 6-7 मास या 1 वर्ष में भी किया जाता है।
  • ▸सम वर्ष (तीसरा, पाँचवाँ, सातवाँ) शुभ।
  • ▸शुभ मास: माघ, फाल्गुन, चैत्र, वैशाख।
  • ▸शुभ तिथि: 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13 (द्वितीया, तृतीया आदि)।

महत्व

1धार्मिक

  • ▸यह एक वैदिक संस्कार है जो बालक को संस्कारित और द्विज बनाने की प्रक्रिया का अंग है।
  • ▸रक्षात्मक — बुरी दृष्टि और अमंगल से सुरक्षा।
  • ▸अलंकार (कुण्डल) धारण — देवताओं और ऋषियों में कुण्डल धारण की परम्परा।

2आयुर्वेदिक (सुश्रुत संहिता)

सुश्रुत संहिता में कर्णवेध के चिकित्सीय लाभ बताए गए हैं:

  • ▸कान छेदने से 'अभिषव' (अंडकोष वृद्धि) और 'आन्त्रवृद्धि' (हर्निया) से रक्षा।
  • ▸एक्यूप्रेशर के सिद्धान्त अनुसार कान में विशिष्ट बिन्दु हैं जो मस्तिष्क विकास और स्वास्थ्य से सम्बन्धित हैं।

विधि

  1. 1शुभ मुहूर्त में बालक को स्नान कराएँ, नए वस्त्र पहनाएँ।
  2. 2गणपति पूजन, हवन।
  3. 3सूर्य की रोशनी में (प्रातःकाल) कान छेदना उत्तम।
  4. 4पहले दायाँ कान (पुत्र), पहले बायाँ कान (पुत्री) — कुछ परम्पराओं में।
  5. 5स्वर्ण या चाँदी की तार/कील से छेदन।
  6. 6घी या तेल का लेप — शीघ्र उपचार हेतु।

ध्यान दें: आज यह प्रायः सुनार या चिकित्सक द्वारा किया जाता है। स्वच्छता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।

लोग यह भी पूछते हैं

कब करें

- सामान्यतः जन्म के तीसरे या पाँचवें वर्ष में। - कुछ परम्पराओं में 6-7 मास या 1 वर्ष में भी किया जाता है। - सम वर्ष (तीसरा, पाँचवाँ, सातवाँ) शुभ। - शुभ मास: माघ, फाल्गुन, चैत्र, वैशाख। - शुभ तिथि: 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13 (द्वितीया, तृतीया आदि)।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

कर्णवेधसंस्कारबालककान छेदन
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

कर्णवेध संस्कार का क्या महत्व है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको षोडश संस्कार से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#कर्णवेध#संस्कार#बालक#कान छेदन