विस्तृत उत्तर
- 1रवि प्रदोष (भानु वार): सूर्य से संबंधित है। जो जातक लंबी बीमारी, हृदय रोग या हड्डियों की समस्याओं से ग्रसित हैं, उनके लिए यह संजीवनी समान है। यह दीर्घायु, आरोग्य और कीर्ति प्रदान करता है।
- 2सोम प्रदोष (इंदु वार): चंद्रमा शिव के मस्तक पर है। दक्ष के श्राप से चंद्रमा को क्षय रोग हुआ था तो शिव तपस्या से ही मुक्ति मिली थी। यह व्रत मानसिक शांति, मनोकामना पूर्ति, 'अखंड सुहाग' और डिप्रेशन (अशांति) दूर करने के लिए अचूक है।





