विस्तृत उत्तर
प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) जिस वार को पड़ता है, उसके अनुसार इसका नाम और विशेष फल भिन्न होता है:
सोम प्रदोष (सोमवार को प्रदोष)
- ▸महत्व: सर्वश्रेष्ठ प्रदोष माना गया है — सोमवार शिव का दिन + प्रदोष = दोहरा शिव कृपा का अवसर।
- ▸विशेष पूजा: दूध से अभिषेक विशेष फलदायी। चंद्रमा शिव के मस्तक पर विराजमान — सोमवार चंद्र का दिन — अतः चंद्र दोष, मानसिक शांति, और मनोकामना पूर्ति विशेष।
- ▸फल: मनोवांछित कामना पूर्ति, दाम्पत्य सुख, मानसिक शांति, चंद्र ग्रह बल।
- ▸उपाय: शिवलिंग पर दूध + शक्कर का अभिषेक, श्वेत फूल, चांदी का दान।
शनि प्रदोष (शनिवार को प्रदोष)
- ▸महत्व: शनि ग्रह दोष निवारण के लिए सर्वश्रेष्ठ।
- ▸विशेष पूजा: तिल तेल का दीपक शिवलिंग के समक्ष जलाना अनिवार्य। सरसों के तेल से अभिषेक शत्रु नाश हेतु।
- ▸फल: शनि दोष (साढ़ेसाती, ढैय्या, शनि महादशा) से मुक्ति, कानूनी विवादों में विजय, कर्म दोष निवारण।
- ▸उपाय: शिवलिंग पर काले तिल, सरसों तेल, काले उड़द की दाल अर्पित करें।
अन्य प्रमुख प्रदोष
- ▸मंगल प्रदोष — ऋण मुक्ति, भूमि लाभ।
- ▸बुध प्रदोष — विद्या, बुद्धि वृद्धि।
- ▸गुरु प्रदोष — संतान सुख, विवाह।
- ▸शुक्र प्रदोष — वैवाहिक सुख, सौंदर्य।
- ▸रवि प्रदोष — पद-प्रतिष्ठा, नेतृत्व।





