विस्तृत उत्तर
प्रदोष काल (संध्या समय) शिव पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। स्कन्द पुराण में इसका विस्तृत वर्णन है:
प्रदोष काल क्या है
सूर्यास्त से पहले और बाद के लगभग 2.5 घंटे (सूर्यास्त से 1 घंटा पहले से 1.5 घंटा बाद तक) को प्रदोष काल कहते हैं। विशेषतः कृष्ण/शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी (13वीं) तिथि को पड़ने वाला प्रदोष 'प्रदोष व्रत' कहलाता है।
प्रदोष में शिव पूजा क्यों विशेष
स्कन्द पुराण के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर नंदी पर आरूढ़ होकर तांडव नृत्य करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति करते हैं। इस समय पूजा करने से शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
विशेष पूजा विधि
- 1सूर्यास्त से पूर्व स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
- 2शिवलिंग पर जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक करें।
- 3चंदन तिलक, बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल अर्पित करें।
- 4'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र 108 बार जपें।
- 5शिव तांडव स्तोत्र या शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करें।
- 6घी का दीपक और कर्पूर से आरती करें।
- 7प्रदोष कथा का श्रवण/पाठ करें।
प्रदोष व्रत नियम
- ▸सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखें।
- ▸फलाहार या निराहार।
- ▸प्रदोष काल में पूजा करने के बाद व्रत खोलें।





