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शिव पर्व📜 शिव पुराण, व्रत परंपरा, लोक मान्यता2 मिनट पठन

सावन के पहले सोमवार की पूजा में क्या विशेष करें?

संक्षिप्त उत्तर

पूरे सावन के व्रत का संकल्प लें। गंगाजल/कावड़ जल से अभिषेक। नई रुद्राक्ष माला अभिमंत्रित। दूध+शक्कर अभिषेक। बेलपत्र माला। शिव चालीसा/महामृत्युंजय नियमित आरंभ। दान (श्वेत वस्तुएं)। प्रदोष काल विशेष पूजा।

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विस्तृत उत्तर

सावन का पहला सोमवार पूरे श्रावण मास के व्रत और साधना का शुभारंभ है — इसकी पूजा में कुछ विशेष बातें ध्यान रखनी चाहिए:

पहले सोमवार की विशेषताएं

1संकल्प

पहले सोमवार को पूर्ण श्रावण मास के व्रत का संकल्प लें — 'मैं श्रावण मास के सभी सोमवारों का व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्ति हेतु रखता/रखती हूं।'

2कावड़ यात्रा/गंगाजल

यदि संभव हो तो पहले सोमवार को गंगाजल या किसी पवित्र नदी का जल लाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें। उत्तर भारत में कावड़ यात्रा (गंगा जल लाकर शिवलिंग अभिषेक) की परंपरा सावन के पहले सोमवार से आरंभ होती है।

3विशेष अभिषेक

  • कच्चे दूध + शक्कर मिलाकर अभिषेक (बुद्धि वृद्धि)।
  • गंगाजल से रुद्राभिषेक (संभव हो तो)।
  • बेलपत्र की माला शिवलिंग पर अर्पित।

4नई रुद्राक्ष माला

पहले सोमवार को नई रुद्राक्ष माला अभिमंत्रित कर जप आरंभ करें — पूरे सावन इसी माला से जप करें।

5शिव चालीसा/महामृत्युंजय

पहले सोमवार से नियमित शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ आरंभ करें — पूरे सावन जारी रखें।

6दान

  • गरीबों को भोजन/वस्त्र दान।
  • ब्राह्मण भोजन।
  • श्वेत वस्तुओं (दूध, चावल, सफेद वस्त्र) का दान शुभ।

7प्रदोष काल पूजा

पहले सोमवार की संध्या (प्रदोष काल) में विशेष पूजा करें — यदि त्रयोदशी भी हो तो सोम प्रदोष बन जाता है, जो अत्यंत शुभ।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, व्रत परंपरा, लोक मान्यता
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