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शिव पर्व📜 शिव पुराण, स्कन्द पुराण, व्रत कथा2 मिनट पठन

श्रावण सोमवार व्रत की पूजा विधि और नियम क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

व्रत: सूर्योदय-सूर्यास्त, निराहार/फलाहार, ब्रह्मचर्य। पूजा: जलाभिषेक → पंचामृत → चंदन → बेलपत्र → 108 जप → स्तोत्र → कर्पूर आरती → कथा। सभी सोमवार व्रत रखें — अधूरा अशुभ। 16 सोमवार व्रत भी विकल्प।

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विस्तृत उत्तर

श्रावण (सावन) के सोमवार का व्रत शिव पूजा में अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी है:

व्रत नियम

  • प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।
  • व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक या पूरे दिन (कुछ में रात्रि भोजन तक)।
  • निराहार व्रत सर्वोत्तम, फलाहार भी स्वीकार्य (फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू)।
  • नमक, अन्न (चावल, गेहूं), दाल आदि का त्याग।
  • ब्रह्मचर्य का पालन।
  • कम बोलना, सत्य बोलना, क्रोध से बचना।

पूजा विधि

  1. 1स्नान के बाद शुद्ध (सफेद/पीले) वस्त्र पहनें।
  2. 2शिवलिंग पर जलाभिषेक करें — गंगाजल सर्वोत्तम।
  3. 3कच्चे दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक।
  4. 4चंदन का त्रिपुंड लगाएं।
  5. 5बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, श्वेत पुष्प अर्पित करें।
  6. 6अक्षत, जनेऊ, कलावा चढ़ाएं।
  7. 7'ॐ नमः शिवाय' 108 बार या महामृत्युंजय मंत्र का जप।
  8. 8शिव चालीसा या शिव स्तोत्र का पाठ।
  9. 9घी का दीपक और कर्पूर से आरती।
  10. 10सोमवार व्रत कथा का श्रवण/पाठ।
  11. 11संध्याकाल में पुनः पूजा करें।
  12. 12व्रत खोलने के बाद सात्विक भोजन करें।

विशेष नियम

  • सावन के सभी 4-5 सोमवार का व्रत रखें — अधूरा संकल्प अशुभ।
  • पहले सोमवार से अंतिम तक व्रत का क्रम टूटना नहीं चाहिए।
  • 16 सोमवार व्रत का संकल्प भी लिया जा सकता है (सावन के बाद भी जारी)।
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, स्कन्द पुराण, व्रत कथा
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