विस्तृत उत्तर
श्रावण (सावन) मास शिव पूजा का सर्वश्रेष्ठ काल माना गया है। इसके प्रमुख कारण:
1समुद्र मंथन कथा
शिव पुराण और भागवत पुराण के अनुसार श्रावण मास में ही समुद्र मंथन हुआ था। इसी मास में भगवान शिव ने हालाहल विष ग्रहण किया और 'नीलकंठ' कहलाए। देवताओं ने शिव की शीतलता हेतु जल, दूध, पंचामृत अर्पित किया — तभी से श्रावण में शिव पूजा और जलाभिषेक की परंपरा प्रारंभ हुई।
2शिव का पृथ्वी पर आगमन
मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान शिव माता पार्वती सहित कैलाश से पृथ्वी लोक पर आते हैं। इस मास में की गई पूजा सीधे शिव तक पहुंचती है।
3चंद्रमा का संबंध
श्रावण मास का स्वामी चंद्रमा है और चंद्रमा शिव के मस्तक पर विराजमान है। अतः यह मास शिव को स्वाभाविक रूप से प्रिय है।
4प्राकृतिक शीतलता
श्रावण वर्षा ऋतु का मास है — प्रकृति में शीतलता और हरियाली होती है। शिव को शीतल वस्तुएं प्रिय हैं — यह ऋतु शिव पूजा के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल है।
5बेलपत्र की उपलब्धता
इस मास में बेलपत्र प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं — शिव पूजा का सर्वप्रमुख अंग सरलता से मिलता है।
श्रावण की विशेषता
- ▸प्रत्येक सोमवार को व्रत और शिव पूजा।
- ▸कावड़ यात्रा — गंगा/नर्मदा जल लाकर शिवलिंग अभिषेक।
- ▸नित्य जलाभिषेक और रुद्राभिषेक।
- ▸श्रावण शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) विशेष।



