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विस्तृत उत्तर
यदि पूर्वज पुनः मानव योनि में जन्म ले चुका है, तो श्राद्ध का फल उसे अन्न-जल, आरोग्य और धन-धान्य के रूप में प्राप्त होता है। वसु, रुद्र और आदित्य श्राद्ध देवता यजमान द्वारा दिए गए हविष्य को उस पितर की वर्तमान योनि और स्थिति के अनुरूप ऊर्जा में रूपांतरित करते हैं। इसलिए मनुष्य योनि में जन्मे पितर को यह तृप्ति भोजन, जल, स्वास्थ्य और समृद्धि के रूप में मिलती है।
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