विस्तृत उत्तर
वैदिक और पौराणिक ग्रंथों में मकर संक्रांति की पूजा-विधि का विधिवत पालन करने से निम्नलिखित प्रतिफल प्राप्त होते हैं:
आरोग्य और आयु-वृद्धि: 'भविष्य पुराण' के अनुसार, जो व्यक्ति सूर्य की नियमपूर्वक उपासना, स्नान और व्रत करता है, वह कुष्ठ रोग, नेत्र विकार, और हृदय रोगों से मुक्त हो जाता है। भगवान सूर्य उसे आरोग्य, मेधा, यश और दीर्घायु प्रदान करते हैं।
पाप मुक्ति और परलोक में सद्गति: 'मत्स्य पुराण' और 'पद्म पुराण' स्पष्ट करते हैं कि तिलधेनु दान, षट्तिला प्रयोग और मकरस्थ सूर्य की आराधना करने वाला व्यक्ति यमलोक की यातनाओं (वैतरणी नदी) से मुक्त होकर विष्णु-लोक या शिव-लोक में पूजित होता है।
पुण्य का अक्षय होना: संक्रांति के दिन किया गया दान कभी क्षय नहीं होता। जो वस्तु हव्य या कव्य के रूप में अर्पित की जाती है, वह परलोक में सहस्र गुना होकर जीव को पुनः प्राप्त होती है।
आत्म-कल्याण एवं मोक्ष: निष्काम भाव से की गई सूर्योपासना साधक को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है।
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