विस्तृत उत्तर
ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड में स्वयं नारायण मुनि ने सरस्वती पूजा के अभूतपूर्व परिणामों का उल्लेख किया है।
शास्त्रों के अनुसार, जो साधक माघ शुक्ल पंचमी के दिन पूर्ण श्रद्धा, सात्त्विक आचरण और विधि-विधान से षोडशोपचार पूजा, कवच और स्तोत्र का पाठ करता है, उसे निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:
१. अज्ञानता का समूल नाश: माता सरस्वती 'निःशेषजाड्यापहा' हैं — वे जड़ता, आलस्य और मूर्खता का पूर्ण रूप से नाश करती हैं। एक अत्यंत अज्ञानी व्यक्ति भी महान विद्वान बन सकता है।
२. कला और वाक्-सिद्धि: स्मरण-शक्ति, वाक्-पटुता, तार्किक क्षमता और कला (संगीत, साहित्य) में निपुणता।
३. परा विद्या और मोक्ष: उनकी विशुद्ध भक्ति व्यक्ति को केवल लौकिक ज्ञान ही नहीं, अपितु 'परा विद्या' (आत्म-साक्षात्कार) भी प्रदान करती है। साधक को जीवन में धन, विद्या, गुणवान संतति और अंततः भगवत्-प्राप्ति होती है।
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