विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण (२.३.२४) का यह अत्यंत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण श्लोक इस प्रकार है — 'गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे। स्वर्गापवर्गास्पदहेतुभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात्॥' इस श्लोक का अर्थ है — देवगण निरंतर यही गान करते हैं कि जिन्होंने स्वर्ग और अपवर्ग (मोक्ष) के मार्ग स्वरूप भारतवर्ष में जन्म लिया है वे पुरुष हम देवताओं से भी अधिक धन्य और बड़भागी हैं। 'स्वर्गापवर्गास्पद' का अर्थ है — स्वर्ग और मोक्ष दोनों का आश्रय स्थल। देवगण कहते हैं कि हमारे स्वर्ग-प्रद कर्मों (पुण्यों) का क्षय होने पर न जाने हम कहाँ जन्म लेंगे किंतु वे मनुष्य धन्य हैं जो भारत भूमि में उत्पन्न होकर अपनी इंद्रियों की शक्ति से क्षीण नहीं हुए हैं और निष्काम कर्म करते हुए साक्षात् श्री हरि में लीन होने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। इस श्लोक का मूल संदेश है कि भारतभूमि पर जन्म स्वर्ग और मोक्ष दोनों का द्वार है जो देवताओं को भी दुर्लभ है।
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