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विस्तृत उत्तर
अंततः, यह एक 'मोक्ष मंत्र' है।
जब जीवन का उद्देश्य पूर्ण हो जाता है और आयु पूरी हो जाती है, तब यह मंत्र साधक को 'उर्वारुकमिव' (ककड़ी की भांति) बिना किसी कष्ट के शरीर त्यागने और जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर परब्रह्म शिव में विलीन होने का मार्ग प्रशस्त करता है।
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