विस्तृत उत्तर
भुवर्लोक में रहने वाले जीवों का पुनः पृथ्वी पर जन्म लेना कई कारणों से होता है। पहला कारण गीता (८.१६) में भगवान का यह वचन है कि ब्रह्मलोक से भूलोक तक सभी लोक पुनरावर्ती हैं और वहाँ से वापस लौटना पड़ता है। दूसरा कारण है त्रिगुणात्मक बंधन — भुवर्लोक के निवासी पूर्णतः सत्वगुणी नहीं हैं। सिद्धों में रजोगुण की प्रधानता है जो उन्हें सिद्धियों में आसक्त रखती है जबकि प्रेतादि में तमोगुण है। यह त्रिगुण आत्मा को बांधे रखता है। तीसरा कारण है पुण्यों का क्षीण होना — भुवर्लोक में संचित पुण्यों और सिद्धियों के क्षीण होने पर जीव को पुनः पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है। मदालसा के उपदेश में भी स्पष्ट कहा गया है कि भुवर्लोक सहित ये सभी लोक आत्मा के अस्थायी पड़ाव हैं। केवल मोक्ष ही इस चक्र से स्थायी मुक्ति दे सकता है।
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