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कर्म बंधन से जुड़े सभी प्रश्न(7)

कर्म बंधन पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 7 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

भुवर्लोक में रहने वाले जीव पुनः पृथ्वी पर क्यों जन्म लेते हैं?

त्रिगुणात्मक बंधन, पुण्यों का क्षीण होना और गीता का यह वचन कि सभी लोक पुनरावर्ती हैं — इन कारणों से भुवर्लोक के जीव पुनः पृथ्वी पर जन्म लेते हैं।

#भुवर्लोक#पुनर्जन्म#त्रिगुण
लोक

भुवर्लोक में भूत-प्रेत क्यों भटकते हैं?

कर्म-बंधन, अकाल मृत्यु या भौतिक आसक्ति के कारण जो आत्माएं पृथ्वी के मोह से मुक्त नहीं हो पातीं वे सूक्ष्म शरीर में भुवर्लोक में भटकती रहती हैं।

#भुवर्लोक#भूत प्रेत#कर्म बंधन
श्रीमद्भागवत

कृष्ण का नाम लेते हुए मृत्यु से क्या फल मिलता है?

कृष्ण में मन लगाकर और उनके नाम का कीर्तन करते हुए शरीर छोड़ने वाला योगी कामना और कर्मबंधन से मुक्त होता है।

#कृष्ण नाम#मृत्यु#भक्ति
श्रीमद्भागवत

कर्म बंधन से मुक्ति कैसे मिले?

कर्म बंधन से मुक्ति तब होती है जब वही कर्म भगवान की प्रसन्नता के लिए समर्पित होकर किए जाएँ।

#कर्म बंधन#मुक्ति#भगवान को अर्पण
सिद्धियाँ और लाभ

त्रिपुर भैरवी साधना से मोक्ष कैसे मिलता है?

माँ भैरवी की नित्य प्रलय शक्ति साधक के अज्ञान, अहंकार और कर्म-संस्कारों का नाश करती है — जिससे वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परमानंद (मोक्ष) प्राप्त करता है।

#मोक्ष प्राप्ति#कर्म बंधन#अज्ञान नाश
असितांग भैरव मंत्र

'सर्व शाप निवर्तिताय' का क्या अर्थ है?

'सर्व शाप निवर्तिताय' का अर्थ है 'सभी प्रकार के श्राप और कर्म बंधनों का निवारण करने वाले' — यह मंत्र शापजन्य असाध्य रोगों की जड़ को नष्ट करता है।

#सर्व शाप निवर्तिताय#शाप निवारण#कर्म बंधन
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

केतु का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

केतु अतीत के कर्म-बंधन, मोक्ष की छटपटाहट और वैराग्य का प्रतीक है।

#केतु#आध्यात्मिक अर्थ#कर्म बंधन
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