विस्तृत उत्तर
कठोर वचन बोलने से संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट हो जाता है।
ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए किसी असहाय, निर्धन, अनाथ या घर आए भिक्षुक का अपमान नहीं करना चाहिए — यह संचित पुण्य को तत्काल नष्ट कर देता है।
मकर संक्रांति का संचित पुण्य कब नष्ट होता है को संदर्भ सहित समझें
मकर संक्रांति का संचित पुण्य कब नष्ट होता है का सबसे सीधा सार यह है: मकर संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट होता है: कठोर वचन बोलने से, किसी असहाय/निर्धन/अनाथ/भिक्षुक का अपमान करने से।
फलश्रुति जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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तिलधेनु दान से मृत्यु के बाद क्या होता है?
तिलधेनु दान का फल: पापमोचन + चिंता-मुक्ति। मृत्यु के बाद: एक कल्प तक शिव-लोक या गौरी-लोक की प्राप्ति। मत्स्य-पद्म पुराण: यमलोक की वैतरणी से मुक्ति + विष्णु-लोक/शिव-लोक में स्थान।
मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना से कौन से रोग दूर होते हैं?
भविष्य पुराण: सूर्य उपासना से दूर होने वाले रोग — कुष्ठ रोग, नेत्र विकार और हृदय रोग। भगवान सूर्य: आरोग्य, मेधा, यश और दीर्घायु प्रदान करते हैं। प्रमाण: साम्ब ने 12 वर्ष सूर्य उपासना से कुष्ठ रोग मुक्ति पाई।
मकर संक्रांति की पूजा और स्नान से क्या फायदे होते हैं?
मकर संक्रांति फल: (1) आरोग्य: कुष्ठ, नेत्र, हृदय रोगों से मुक्ति; आरोग्य-मेधा-यश-दीर्घायु, (2) पाप मुक्ति + विष्णु-लोक/शिव-लोक में स्थान, (3) दान कभी क्षय नहीं — परलोक में सहस्र गुना वापस, (4) निष्काम उपासना = मोक्ष।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में सरस्वती पूजा का क्या फल बताया है?
ब्रह्मवैवर्त पुराण: माता सरस्वती = 'निःशेषजाड्यापहा' — जड़ता, आलस्य, मूर्खता का पूर्ण नाश। अज्ञानी भी महान विद्वान बन सकता है। फल: परा विद्या (आत्म-साक्षात्कार), धन, विद्या, गुणवान संतति और अंततः भगवत्-प्राप्ति।
सरस्वती पूजा करने से क्या फायदे होते हैं?
सरस्वती पूजा के फायदे: (1) अज्ञानता-जड़ता-आलस्य का समूल नाश, अज्ञानी भी विद्वान बन सकता है, (2) स्मरण शक्ति, वाक्-पटुता, तार्किक क्षमता, संगीत-साहित्य में निपुणता, (3) 'परा विद्या' (आत्म-साक्षात्कार), धन, विद्या, संतति और अंततः भगवत्-प्राप्ति।
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