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मकर संक्रांति का संचित पुण्य कब नष्ट होता है?

संक्षिप्त उत्तर

मकर संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट होता है: कठोर वचन बोलने से, किसी असहाय/निर्धन/अनाथ/भिक्षुक का अपमान करने से।

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विस्तृत उत्तर

कठोर वचन बोलने से संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट हो जाता है।

ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए किसी असहाय, निर्धन, अनाथ या घर आए भिक्षुक का अपमान नहीं करना चाहिए — यह संचित पुण्य को तत्काल नष्ट कर देता है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

मकर संक्रांति का संचित पुण्य कब नष्ट होता है को संदर्भ सहित समझें

मकर संक्रांति का संचित पुण्य कब नष्ट होता है का सबसे सीधा सार यह है: मकर संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट होता है: कठोर वचन बोलने से, किसी असहाय/निर्धन/अनाथ/भिक्षुक का अपमान करने से।

फलश्रुति जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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