विस्तृत उत्तर
ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए किसी असहाय, निर्धन, अनाथ या घर आए भिक्षुक का अपमान नहीं करना चाहिए।
कठोर वचन बोलने से संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट हो जाता है।
मकर संक्रांति पर किसी का अपमान क्यों नहीं करना चाहिए को संदर्भ सहित समझें
मकर संक्रांति पर किसी का अपमान क्यों नहीं करना चाहिए का सबसे सीधा सार यह है: मकर संक्रांति पर: किसी असहाय, निर्धन, अनाथ या भिक्षुक का अपमान न करें। कठोर वचन बोलने से संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट हो जाता है।
नियम और निषेध जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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वसंत पंचमी पर वाणी की शुद्धि क्यों जरूरी है?
देवी सरस्वती = वाणी की अधिष्ठात्री। इस दिन कटु वचन, अपशब्द, किसी का अपमान या असत्य = साक्षात् वाग्देवी का अपमान। वाक्-शुद्धि = वसंत पंचमी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण अदृश्य नियम।
मकर संक्रांति का व्रत कौन कर सकता है?
भविष्य पुराण: ब्राह्मणों से लेकर शूद्रों तक — सभी वर्ण, आयु और लिंग के लोगों को मकर संक्रांति व्रत का पूर्ण अधिकार। क्षमतानुसार मंत्र-सहित या बिना मंत्र। महिलाएँ: सुहाग-सामग्री, कुमकुम, हल्दी, अन्न का दान।
मकर संक्रांति पर दान में क्या नहीं देना चाहिए?
मकर संक्रांति पर दान में वर्जित: बासी या जूठा अन्न, पुराने/फटे-पुराने वस्त्र, काले वस्त्र। दान हमेशा शुद्ध नवान्न (नया अन्न) और उपयोग योग्य उत्तम वस्तुओं का ही करें।
मकर संक्रांति पर पेड़-पौधे क्यों नहीं काटने चाहिए?
मकर संक्रांति पर पेड़-पौधों की पत्तियाँ तोड़ना, वृक्ष काटना या फसल अकारण काटना = अशुभ। कारण: यह प्रकृति के प्रति सम्मान का दिन है।
मकर संक्रांति पर दांत साफ करने का क्या नियम है?
मकर संक्रांति पर दंतधावन नियम: दातुन (पेड़ की टहनी) चबाकर दांत साफ करना — निषिद्ध। मुख शुद्धि केवल जल या जड़ी-बूटियों के कुल्ले से करें।
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