विस्तृत उत्तर
ऊर्ध्वरेता वे सिद्ध और परम विरक्त ब्रह्मचारी होते हैं जिन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन में कभी अपने वीर्य (प्राण ऊर्जा) का स्खलन नहीं किया है और अपनी सम्पूर्ण जैविक एवं मानसिक ऊर्जा को आध्यात्मिक तेज में परिवर्तित कर लिया है। ऊर्ध्व का अर्थ है ऊपर की ओर और रेता का अर्थ है वीर्य — इस प्रकार ऊर्ध्वरेता का अर्थ है वह जिसकी प्राण-शक्ति ऊर्ध्वगामी है। यह अखण्ड ब्रह्मचर्य, योग और तपस्या ही उन्हें इस भौतिक ब्रह्माण्ड के सर्वोच्च शिखर सत्यलोक पर निवास करने का अधिकार प्रदान करती है। विष्णु पुराण के अनुसार सत्यलोक में 88,000 ऊर्ध्वरेता मुनि निवास करते हैं।
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