विस्तृत उत्तर
विशेषकर अनुष्ठान काल में, साधक को पूर्णतः सात्त्विक आचरण (अहिंसा, सत्य, अक्रोध) अपनाना चाहिए।
सात्त्विक, हल्का आहार और ब्रह्मचर्य का पालन ऊर्जा को संचित रखने के लिए अनिवार्य है।
अनुष्ठान काल में सात्त्विक आचरण (अहिंसा, सत्य, अक्रोध), हल्का आहार और ब्रह्मचर्य ऊर्जा संचय के लिए अनिवार्य हैं।
विशेषकर अनुष्ठान काल में, साधक को पूर्णतः सात्त्विक आचरण (अहिंसा, सत्य, अक्रोध) अपनाना चाहिए।
सात्त्विक, हल्का आहार और ब्रह्मचर्य का पालन ऊर्जा को संचित रखने के लिए अनिवार्य है।
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