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विस्तृत उत्तर
नैष्ठिक ब्रह्मचर्य वह अवस्था है जिसमें साधक जीवन भर अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करता है। चार कुमारों ने अखंड नैष्ठिक ब्रह्मचर्य का कठोर व्रत लिया। नैष्ठिक ब्रह्मचारी वह होता है जिसका रेत कभी स्खलित नहीं होता और जो ऊर्ध्वरेता रहता है। चार कुमारों ने इसी ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए सदैव पाँच वर्ष के बालकों के रूप में रहने का वरदान माँगा।
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