विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में ब्रह्मचर्य श्रवण-व्रत का हिस्सा है। पाठ कहता है कि वैष्णव दीक्षा से रहित व्यक्ति कथा श्रवण का अधिकारी नहीं। जो नियम से कथा सुनता है, उसे ब्रह्मचर्य से रहना, भूमि पर सोना और प्रतिदिन कथा समाप्त होने पर पत्तल में भोजन करना चाहिए। यह व्यवस्था श्रोता को सात दिनों तक संयमित और कथा-केंद्रित रखने के लिये है। ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मन को विषयों से हटाकर कथा में स्थिर रखने की सहायता करता है। आगे काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष छोड़ने का निर्देश इसी संयम को और व्यापक बनाता है। इसलिए ब्रह्मचर्य श्रवण की शुद्धि और फल के लिये आवश्यक माना गया है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





