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श्रवण से जुड़े सभी प्रश्न(38)

श्रवण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 38 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

कृष्ण लीला सुनने का फल क्या है?

कृष्ण लीला को सुनने, गाने, कीर्तन करने और याद करने वाले भक्त शीघ्र ही कृष्ण के चरणकमल का दर्शन पाते हैं, जो जन्म-मृत्यु का प्रवाह रोक देता है।

#कृष्ण लीला#श्रवण#कीर्तन
श्रीमद्भागवत

कृष्ण कथा सुनते-सुनते भक्ति कैसे बढ़ती है?

नारदजी ने श्रद्धा से कृष्ण कथा सुनी; पद-पद सुनते हुए भगवान में रुचि हुई और भक्ति प्रकट होकर रज-तम को हटाने लगी।

#कृष्ण कथा#भक्ति वृद्धि#श्रवण
श्रीमद्भागवत

सूतजी ने भागवत कथा किससे सीखी?

सूतजी शुकदेवजी की भागवत कथा के समय वहाँ बैठे थे और उनकी कृपा से उन्होंने इसका अध्ययन किया।

#सूतजी#शुकदेव#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भगवान की कथा में रुचि कैसे बढ़ती है?

महात्मा सेवा से श्रवण की इच्छा और श्रद्धा आती है; कथा सुनने से कृष्ण हृदय की अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं।

#भगवत कथा#कथा रुचि#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भगवान को प्रसन्न कैसे करें?

अपने धर्म की पूर्ण सिद्धि भगवान को प्रसन्न करने में है; इसलिए एकाग्र मन से उनका श्रवण, कीर्तन, ध्यान और पूजन करना चाहिए।

#भगवान को प्रसन्न#श्रवण#कीर्तन
श्रीमद्भागवत

कृष्ण कथा सुनने की इच्छा क्यों बढ़ती है?

क्योंकि भगवान का यश कलियुग के पापों को हरता है और रसिक श्रोताओं को उनकी लीला में पद-पद पर नया रस मिलता है।

#कृष्ण कथा#हरि कथा#भगवत लीला
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनाने वाले को क्या फल मिलता है?

जो नियमपूर्वक भक्ति से सुनता है और जो शुद्ध वैष्णवों के सामने सुनाता है, दोनों यथार्थ फल पाते हैं; उनके लिये कुछ असाध्य नहीं।

#कथा सुनाना#वक्ता फल#वैकुंठ
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने पढ़ने और मनन से मुक्ति कैसे मिलती है?

शुकदेवजी कहते हैं कि जो भक्ति से भागवत के श्रवण, पठन और मनन में तत्पर रहता है, वह मुक्त हो जाता है।

#श्रवण#पठन#मनन
श्रीमद्भागवत

भागवत रस बार-बार क्यों पीना चाहिए?

शुकदेवजी कहते हैं कि भागवत रस अमृतमय, छिलका-गुठली रहित और दुर्लभ है; चेतना रहते इसे बार-बार पीना चाहिए।

#भागवत रस#श्रवण#शुकदेव
श्रीमद्भागवत

रोगी लोग भागवत कथा क्यों सुनें?

धनहीन, क्षयरोगी, अन्य रोगों से पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मोक्ष इच्छुक लोगों को कथा सुनने को कहा गया है।

#रोगी#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में ब्रह्मचर्य क्यों जरूरी है?

नियमपूर्वक कथा सुनने वाले के लिये ब्रह्मचर्य, भूमि पर शयन और संयमित भोजन को श्रवण-व्रत का अंग बताया गया है।

#ब्रह्मचर्य#भागवत सप्ताह#नियम
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में एक समय भोजन कर सकते हैं?

हाँ, एक समय भोजन का विधान है; श्रोता हविष्य अन्न या सुविधा अनुसार एक समय भोजन करके कथा सुन सकता है।

#एक समय भोजन#भागवत सप्ताह#आहार
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में उपवास जरूरी है?

उपवास अनिवार्य नहीं है; यदि उपवास से श्रवण में बाधा हो तो भोजन करना बेहतर बताया गया है।

#उपवास#भागवत सप्ताह#आहार
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा रोज कितनी देर सुननी चाहिए?

वक्ता को सूर्योदय से कथा आरंभ कर साढ़े तीन पहर तक मध्यम स्वर में कथा पढ़नी चाहिए, बीच में दो घड़ी विराम है।

#कथा समय#श्रवण#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में कौन सा संकल्प लें?

वक्ता के सामने कल्याण के लिये सात दिन तक यथाशक्ति नियम धारण करने और शुद्ध चित्त से कथा में मन लगाने का संकल्प लें।

#संकल्प#भागवत सप्ताह#नियम
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।

#भगवान कृष्ण#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?

सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

#संशय#भागवत कथा#हृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से हृदय की गांठ कैसे खुलती है?

कहा गया है कि सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, संशय कटते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

#हृदय ग्रंथि#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रद्धा क्यों जरूरी है?

श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि गुरु वचन में विश्वास और स्थिर मन के बिना कथा श्रवण का पूरा फल नहीं मिलता।

#श्रद्धा#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने वालों को अलग-अलग फल क्यों मिलता है?

फल का भेद श्रवण के भेद से हुआ; सबने सुना, पर धुंधुकारी ने निराहार रहकर स्थिर मन से मनन भी किया।

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श्रीमद्भागवत

कथा सुनने का पूरा फल कैसे मिलता है?

पूरा फल गुरु वचन में विश्वास, दीनता, मन-दोषों पर विजय, कथा में एकाग्रता और श्रवण के बाद मनन से मिलता है।

#कथा फल#श्रवण#मनन
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह से पाप कैसे मिटते हैं?

कथा में भागवत सप्ताह को आग की तरह बताया गया है, जो मन, वचन और कर्म से हुए छोटे-बड़े पापों को जला देता है।

#भागवत सप्ताह#पाप नाश#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से प्रेत मुक्ति कैसे होती है?

सूर्यदेव ने भागवत सप्ताह को मुक्ति का उपाय बताया; सात दिन कथा सुनकर धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।

#भागवत कथा#प्रेत मुक्ति#सप्ताह
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से पाप मिटते हैं?

भागवत कथा, पाठ, श्रवण, दर्शन और सेवन को पाप नष्ट करने वाला बताया गया है।

#भागवत कथा#पाप नाश#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा की विधि क्या है?

भागवत कथा के लिये पवित्र स्थान, श्रद्धापूर्वक श्रवण, सत्य, ब्रह्मचर्य और कलियुग में सात दिन की विधि बताई गई है।

#भागवत कथा विधि#श्रवण#सत्य
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने के फायदे?

भागवत सुनने से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल मिलता है, कलियुग दोष मिटते हैं और शोक-दुख नष्ट होते हैं।

#भागवत#श्रवण#ज्ञान
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने के क्या लाभ हैं?

भागवत कथा को पवित्र करने वाली, कृष्ण-प्राप्ति कराने वाली, भक्ति बढ़ाने वाली और वैकुंठफलदायक कहा गया है।

#भागवत कथा#श्रवण#भक्ति
लोक

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था कैसे काम करती है?

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था श्रवण-श्रवणी देवों से चलती है, जो हर गुप्त कर्म देखकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

#यमलोक गुप्तचर व्यवस्था#श्रवण#श्रवणी
जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण किसे नहीं करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण किसी के लिए भी पूर्णतः वर्जित नहीं। 'घर में न रखने' की धारणा भ्रामक है। परंपरागत सावधानी — गर्भवती, अबोध बच्चे और अत्यंत संवेदनशील व्यक्तियों को विस्तृत यातना-वर्णन से दूर रखा जा सकता है।

#प्रेतकल्प#वर्जना#श्रवण
जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण किस उद्देश्य से किया जाता है?

प्रेतकल्प श्रवण के उद्देश्य — मृत आत्मा की सद्गति, परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान, मृत्यु की सच्चाई समझना, पाप-मोचन और वैराग्य-आत्मज्ञान की प्राप्ति।

#प्रेतकल्प#उद्देश्य#श्रवण
जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण क्यों करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण करना चाहिए — पापों से मुक्ति, मृत आत्मा को सद्गति, विष्णु-प्रदत्त ज्ञान की प्राप्ति, प्रेतत्व से बचाव और परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान के लिए।

#प्रेतकल्प#श्रवण#फल
भक्ति एवं आध्यात्म

भगवान हमारी प्रार्थना कैसे सुनते हैं

भगवान अंतर्यामी हैं — हर हृदय में निवास करते हैं। प्रार्थना सीधे उन तक पहुँचती है। उनका उत्तर मन में शांति, स्पष्ट विचार, परिस्थिति में बदलाव या गुरु-संत के माध्यम से आता है।

#प्रार्थना#भगवान#श्रवण
भक्ति एवं आध्यात्म

नवधा भक्ति में कौन सी भक्ति सबसे सरल है

प्रह्लाद के अनुसार श्रवण सर्वश्रेष्ठ है। कलियुग के लिए नाम-संकीर्तन सबसे सुलभ है — देश-काल का कोई बंधन नहीं। जो स्वभाव से सहज लगे वही सबसे सरल भक्ति है।

#नवधा भक्ति#श्रवण#सरल भक्ति
भक्ति एवं आध्यात्म

श्रवण कीर्तन स्मरण पादसेवन अर्चन वंदन दास्य सख्य आत्मनिवेदन

नवधा भक्ति के नौ अंग — श्रवण (कथा सुनना), कीर्तन (गान), स्मरण (स्मरण), पादसेवन (चरण-सेवा), अर्चन (पूजा), वंदन (नमस्कार), दास्य (सेवक-भाव), सख्य (मित्र-भाव), आत्मनिवेदन (पूर्ण समर्पण)। एक भी पूर्ण हो तो मोक्ष मिले।

#नवधा भक्ति#श्रीमद्भागवत#श्रवण
दैनिक आचार

गर्भावस्था में कौन से मंत्र सुनने चाहिए

गायत्री मंत्र (बुद्धि), विष्णु सहस्रनाम, गीता, सुंदरकांड, संतान गोपाल, महामृत्युंजय। शास्त्र: अभिमन्यु + प्रह्लाद = गर्भ में सीखा। विज्ञान: prenatal music therapy लाभकारी।

#गर्भावस्था#मंत्र#श्रवण
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करें?

उपनिषदों में आत्मज्ञान की विधि है — मुमुक्षुत्व → सद्गुरु → श्रवण → मनन → निदिध्यासन → 'नेति नेति' विचार → अपरोक्षानुभूति। बृहदारण्यक (4/4/22) — 'आत्मा श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यः।' कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती।

#आत्मज्ञान#उपनिषद#आत्म-साक्षात्कार
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में साधना का महत्व क्या है?

उपनिषदों में साधना का मूल मार्ग है — श्रवण → मनन → निदिध्यासन (बृहदारण्यक 4/4/22)। साधन-चतुष्टय — विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति और मुमुक्षुत्व — वेदांत साधना के चार अनिवार्य अंग हैं। छान्दोग्य (7/26) — आहार-शुद्धि से मन-शुद्धि और मन-शुद्धि से ब्रह्म-साक्षात्कार।

#साधना#उपनिषद#श्रवण
मंत्र विधि

मंत्र जप ऑनलाइन सुनकर करने से भी फल मिलता है क्या?

श्रवण = भक्ति का प्रथम प्रकार — सुनना लाभदायी। परंतु: स्वयं जप > सुनना (कंपन, चक्र, चारों इन्द्रियां)। ऑनलाइन सीमा: विक्षेप, अशुद्ध उच्चारण। सुझाव: सुनते समय मन में जपें। प्रामाणिक स्रोत। स्वयं जप = कोई विकल्प नहीं।

#ऑनलाइन#सुनना#श्रवण
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