विस्तृत उत्तर
भागवत कथा के दैनिक समय का विधान दिया गया है। बुद्धिमान वक्ता को सूर्योदय से कथा आरंभ करनी चाहिए और साढ़े तीन पहर तक मध्यम स्वर में अच्छी तरह कथा पढ़नी चाहिए। दोपहर में दो घड़ी के लिये कथा विराम रखा जाता है। उस समय कथा के प्रसंग के अनुसार वैष्णवों को भगवान के गुणों का कीर्तन करना चाहिए, व्यर्थ बात नहीं करनी चाहिए। इस व्यवस्था से दिन का मुख्य भाग कथा श्रवण में बीतता है, पर बीच में कीर्तनमय विश्राम भी रहता है। श्रोता को आहार संयम इसलिए बताया गया है कि मल-मूत्र के वेग से कथा सुनने में बाधा न हो। अतः दैनिक श्रवण लंबा, नियमित और कीर्तन-समन्वित है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





