विस्तृत उत्तर
भगवान हमारी प्रार्थना कैसे सुनते हैं — यह आस्था का गहरा प्रश्न है जिसका उत्तर शास्त्र, संत और स्वानुभव तीनों में मिलता है।
शास्त्रीय दृष्टि से — श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि भगवान विष्णु 'अंतर्यामी' हैं — प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करते हैं। उपनिषद के अनुसार परमात्मा प्रत्येक हृदय में 'आत्मा' के रूप में विद्यमान है। इसलिए प्रार्थना दूर कहीं नहीं भेजी जाती — वह सीधे भगवान तक पहुँचती है जो हमारे भीतर ही हैं।
ईशावास्यमिदं सर्वम्' — यह संपूर्ण जगत ईश्वर से व्याप्त है। तो प्रार्थना भगवान तक पहुँचेगी ही — क्योंकि वे सर्वत्र हैं।
भगवत्-उत्तर के रूप — भगवान का उत्तर विभिन्न रूपों में आता है —
- 1मन में अचानक एक स्पष्ट विचार या निर्णय आना
- 2किसी संत, गुरु या सद्ग्रंथ के माध्यम से मार्गदर्शन मिलना
- 3परिस्थितियों में अप्रत्याशित बदलाव
- 4स्वप्न में संकेत मिलना
- 5मन में असामान्य शांति और ढाढस आना
श्री रामकृष्ण परमहंस कहते थे — 'जब भगवान सुनते हैं तो पहला उत्तर शांति के रूप में आता है।' भक्त की व्याकुलता कम होना और मन में स्थिरता आना — यह भगवान के उत्तर का प्रथम संकेत है।
अनुभव — ध्रुव, प्रह्लाद, मीरा, तुलसीदास — इन सभी भक्तों ने अपने-अपने अनुभव में पाया कि भगवान ने उनकी पुकार सुनी और उत्तर दिया।





