विस्तृत उत्तर
भागवत कथा सुनाने वाले का फल अंतिम वचनों में बताया गया है। पहले कहा गया है कि शुकदेवजी ने प्रेमरस के प्रवाह में इस कथा को कहा था; जिसके कंठ से इसका संबंध हो जाता है, वह वैकुंठ का स्वामी बनता है। फिर सूतजी कहते हैं कि अनेक शास्त्रों को देखकर उन्होंने यह परम गोपनीय रहस्य सुनाया है और संसार में शुककथा से अधिक पवित्र कुछ नहीं। जो व्यक्ति नियमपूर्वक भक्ति से इस कथा को सुनता है और जो शुद्ध वैष्णवों के सामने इसे सुनाता है, वे दोनों विधि का पूरा पालन करने से इसका यथार्थ फल प्राप्त करते हैं। उनके लिये लोक में कुछ भी असाध्य नहीं रहता। इसलिए श्रोता और वक्ता दोनों के लिये कथा अत्यंत फलदायी है।
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