विस्तृत उत्तर
कथा सुनने का पूरा फल कैसे मिलता है, यह विष्णुपार्षदों के उत्तर में बताया गया है। वे कहते हैं कि धुंधुकारी को विशेष फल इसलिए मिला क्योंकि उसने सात दिन निराहार रहकर श्रवण किया और स्थिर चित्त से मनन-निदिध्यासन किया। वे चेतावनी देते हैं कि दृढ़ न हुआ ज्ञान व्यर्थ हो जाता है, प्रमाद से श्रवण नष्ट होता है, संदेह से मंत्र निष्फल होता है और चंचल चित्त से जप का फल नहीं मिलता। श्रवण का यथार्थ फल पाने के लिये गुरु वचन में विश्वास, अपने भीतर दीनता, मन के दोषों पर विजय और कथा में निश्चल मन की आवश्यकता कही गई है। जिन श्रोताओं में ये गुण आएँगे, वे फिर कथा सुनकर वैकुंठ को प्राप्त होंगे।
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