विस्तृत उत्तर
रोगी लोगों के लिये भागवत कथा सुनने का निर्देश विशेष रूप से दिया गया है। पाठ में धनहीन, क्षयरोगी, अन्य रोगों से पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मोक्ष की इच्छा रखने वाले लोगों को यह कथा सुनने को कहा गया है। कथा को उत्तम फल देने वाली, पापहरिणी और भोग-मोक्ष देने वाली बताया गया है। इसलिए रोगी के लिये कथा केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि मनोबल, शुद्धि और भगवत आश्रय का साधन है। पहले सप्ताह-व्रत के नियमों में भी कहा गया है कि आहार ऐसा हो जो श्रवण में सहायक हो, शरीर को अनावश्यक कष्ट न दे। रोगी व्यक्ति अपनी शक्ति के अनुसार श्रवण कर सकता है और कथा के फल का अधिकारी बन सकता है।
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